महान आईबीसी विरोधाभास: जब IBBI 207 आरपी का लाइसेंस रद्द करे, तो फ़ैक्टरी कौन वापस खड़ी करेगा?
जब 207 इनसॉल्वेंसी प्रोफेशनल्स का लाइसेंस ‘fit and proper’ टेस्ट में फेल होने पर रद्द होता है, तो असुविधाजनक सच सामने आता है: शून्य औद्योगिक अनुभव वाले संरक्षक करोड़ों की फ़ैक्टरियाँ कानूनी छूट के साथ ज़मीन पर गिरा रहे थे। बिल्डर पर धारा 29A और LOC; बाबू पर धारा 233 की ढाल—यह विरोधाभास ही आईबीसी का असल चेहरा है।

“उद्यमी दशकों लैब और शेड में बिताता है। आरपी एक परीक्षा पास करके Day-1 कुंजी ले लेता है। IBBI ने 207 नाम रद्द किए—लेकिन जो फ़ैक्टरियाँ कबाड़ बन चुकीं, उन्हें कौन दोबारा खड़ा करेगा?”
The420.in / क्षेत्रीय कवरेज के अनुसार IBBI ने 207 इनसॉल्वेंसी प्रोफेशनल्स के रजिस्ट्रेशन रद्द किए—पिछले आठ साल में इसी आधार पर मात्र ~28 रद्द हुए थे। आधिकारिक भाषा इसे ‘नियामक स्वच्छता’ कहती है; बिल्डर इसे उस हाथी का नाम देता है जिस पर सब चुप रहते हैं।
1. बिल्डर का बोझ बनाम कस्टोडियन की ढाल
CIRP की संरचनात्मक ख़राबी असमान जवाबदेही में है। एक तरफ़ व्यवसाय का निर्माता; दूसरी तरफ़ प्रशासनिक नियुक्ति।
- बिल्डर: दशकों की मेहनत, पर्सनल गारंटी, Day-1 बेदख़ली, LOC, धारा 29A की पाबंदी, फिर शॉर्टफ़ॉल का निजी पीछा।
- आरपी: इनसॉल्वेंसी परीक्षा; धारा 233 के तहत ‘good faith’ की कानूनी छूट; सुपर-प्रायॉरिटी फ़ीस (धारा 53)।
सु-काम में छह ऑटोमेटेड प्लांट, 100+ फ़ाइलिंग्स (77 पेटेंट सहित), ₹600 Cr राजस्व—फिर भी शॉर्ट-टर्म लिक्विडिटी पर नियंत्रण अजनबी के हाथ में चला गया।

2. सु-काम: वैल्यू डेस्ट्रक्शन की एनाटॉमी
- वर्किंग कैपिटल की नाकाबंदी: कच्चा माल रुकता है, लाइन ठप।
- R&D ब्रेन-ड्रेन: इंजीनियर इंतज़ार नहीं करते।
- डीलर/वारंटी का क्षरण: ब्रांड गुडविल गिरती है।
- पेटेंट lapse: मेंटेनेंस फ़ीस ‘ग़ैर-ज़रूरी’ मानकर बंद।
180–330 दिनों में दशकों का उद्यम टर्मिनल क्षय में चला जाता है। इरादा हमेशा विनाश नहीं होता—क्षमता नहीं होती। चेकलिस्ट, रिपोर्ट, ट्रिब्यूनल—और घड़ी ख़त्म होने पर वैल्यूएशन अक्सर 90% गिर चुका होता है।
3. बैंक आरपी को जवाबदेह क्यों नहीं ठहराते?
- IRPC सुपर-प्रायॉरिटी: बैंकों से पहले आरपी/वकील/वैल्यूअर की फ़ीस।
- CoC की ‘कमर्शियल विज़डम’: लोन अधिकारी पर व्यक्तिगत पेनल्टी नहीं; NPA राइट-ऑफ़ और रीकैपिटलाइज़ेशन।
- धारा 233 की छूट: पहुँच में रहता है फाउंडर—29A से बिड पर रोक, फिर पर्सनल गारंटी पर चक्रवृद्धि ब्याज़।
Part 10 में दर्ज: IBBI ने सु-काम के RP और लिक्विडेटर दोनों पर पेनल्टी ठोकी। बैंकों ने क़र्ज़ घटाया? उद्यम को मुआवज़ा? एक रुपया नहीं।

4. तीन ज़रूरी सुधार
- परिचालन जवाबदेही: going-concern वैल्यू नष्ट हो तो आरपी पर दीवानी/आर्थिक दायित्व।
- सेक्टर-स्पेसिफ़िक ऑपरेटिंग मैनेजमेंट: कंप्लायंस आरपी के पास; शॉप-फ़्लोर अनुभवी ऑपरेटरों के पास।
- धोखाधड़ी बनाम ईमानदार संकट: 29A का अंधाधुंध बहिष्कार बंद; Part 14 का फ़ॉरेंसिक गेटकीपर—सिफ़निंग = अपराध, ईमानदार हार = फ़्रेश स्टार्ट।
207 अयोग्य नाम रद्द होना शुरुआत है। सर्कुलर फ़ैक्टरी नहीं लौटाते। अगला अध्याय—भाग 16: 77 पेटेंट तितर-बितर—बताता है वह वैक्यूम चीन ने कैसे भरा।
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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
- Q1: IBBI ने 207 IPs क्यों रद्द किए?
- रिपोर्टिंग के अनुसार ‘fit and proper’ मानदंडों पर कमी पाए जाने पर रजिस्ट्रेशन रद्द किए गए—पिछले आठ वर्षों की तुलना में यह बड़े पैमाने की सफ़ाई है।
- Q2: आरपी पर वैल्यू डेस्ट्रक्शन की ज़िम्मेदारी क्यों नहीं बैठती?
- धारा 233 ‘good faith’ छूट और IRPC की सुपर-प्रायॉरिटी के कारण व्यवहार में बैंक/कोर्ट का दबाव फाउंडर पर लौट आता है, जबकि कस्टडी में एसेट सिकुड़ते रहते हैं।
- Q3: लेखक कौन से सुधार माँगता है?
- आरपी की परिचालन जवाबदेही, सेक्टर-अनुभवी ऑपरेटिंग मैनेजमेंट, और 29A/फ़ॉरेंसिक गेटकीपर से धोखाधड़ी व ईमानदार संकट का स्पष्ट विभाजन।
इस सीरीज़ में
The IBC Files: भारत का दिवालिया क़ानून — अनुभवजन्य रिकॉर्ड
हिंदी · भाग 01–17 लाइव
- भाग 01 · HI
IBC के संशोधन: फ़ैक्टरी या बैंक का बहीखाता? - भाग 02 · HI
टूटा हुआ सिस्टम - भाग 03 · HI
IBC: क़र्ज़ का जाल - भाग 04 · HI
फ़ेयर बनाम लिक्विडेशन वैल्यू - भाग 05 · HI
Section 29A - भाग 06 · HI
CIRP की बेबसी: 180 दिन - भाग 07 · HI
जिस दिन सु-काम की मौत हुई - भाग 08 · HI
उद्यमी = मुजरिम - भाग 09 · HI
पर्सनल गारंटी का फंदा - भाग 10 · HI
आईबीबीआई पेनल्टी, शून्य मुआवज़ा - भाग 11 · HI
सप्लायर्स का मूक नरसंहार - भाग 12 · HI
कार और फ़ैक्टरी - भाग 13 · HI
होम लोन बनाम फ़ैक्टरी लोन - भाग 14 · HI
सुभाष चंद्रा केस - भाग 15 · आप यहाँ हैं
बिल्डर बनाम बाबू - भाग 16 · HI
77 पेटेंट और चीनी क़ब्ज़ा - भाग 17 · HI
राख से पुनर्जन्म - भाग 18–20 · EN hub / आगामी →
कुंवर सचदेव
संस्थापक एवं एमडी, सु-कैम पावर सिस्टम्स (1988–2019) और Kunwwer.ai — मैन्युफैक्चरिंग, दिवालियापन और सभ्यतागत स्मृति पर लेखन। उनकी कहानी पढ़ें →