अमर उजाला — उत्तर भारत के सबसे पुराने और भरोसेमंद हिंदी अखबारों में से एक — ने कुंवर सचदेव की ज़िंदगी की कहानी को एक विस्तृत फोटो फीचर में कवर किया है।
लेख में बताया गया है कि कुंवर सचदेव का जन्म दिल्ली के एक मध्यमवर्गीय पंजाबी परिवार में हुआ। पिता भारतीय रेलवे में क्लर्क थे। प्राइमरी तक प्राइवेट स्कूल में पढ़ाई हुई, फिर पैसों की कमी के कारण सरकारी स्कूल। 12वीं के बाद मेडिकल का एंट्रेंस पास किया लेकिन इंटर में कम नंबरों के कारण एडमिशन नहीं हुआ। फिर इंजीनियरिंग कॉलेज में दाखिला हुआ, कॉलेज के दिनों में भाई के साथ पेन बेचे, नौकरी की और फिर 1998 में Su-Kam की नींव रखी।
अमर उजाला की यह फीचर दर्शाती है कि सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता — हर कदम संघर्ष, धैर्य और सही निर्णय से ही आता है।
पूरी फोटो फीचर पढ़ें अमर उजाला पर।

