स्रोत: पत्रिका, मेरठ — 4 अप्रैल 2026

90 का दशक बिजली की किल्लत वाला कहा जा सकता है। ये वो समय था जब शहरों में कई घंटे बिजली गुल होती थी। इस दौरान शहर अंधेरे में रहते थे और बच्चों की पढ़ाई से लेकर व्यापार तक प्रभावित होता था। इसी दौरान ‘द इन्वर्टर मैन ऑफ इंडिया’ और ‘द सोलर मैन ऑफ इंडिया’ जैसे खिताबों से नवाजे गए कुँवर सचदेव ने पावर बैकअप की दुनिया में क्रांति लाने का काम शुरू किया।
1998 में रोशनी की दुनिया में क्रांति

कुँवर सचदेव ने साल 1998 में इन्वर्टर बनाकर रोशनी की दुनिया में क्रांति ला दी। उसके बाद से आज हर घर में इनवर्टर हो गए हैं। उन्होंने भारत का पहला डिजिटल इन्वर्टर बनाने की इस अविश्वसनीय यात्रा में नवीन और उपयोगकर्ता की आवश्यकता के अनुकूल उत्पाद तैयार किए। भारत में बने इनवर्टर ने न केवल देश में बल्कि मध्य पूर्व, अफ्रीका, बांग्लादेश और नेपाल जैसे देशों में भी अपनी पहचान बनाई।
सीमा पार बजा भारत में बने इनवर्टर का डंका
कुंवर सचदेव ने 1990 के दशक में पावर बैकअप उद्योग के असंगठित बाजार का विश्लेषण किया और प्लास्टिक-बॉडी इन्वर्टर बनाए। इसके बाद इनवर्टर में माइक्रोकंट्रोलर और डीएसपी साइन वेव लाने का काम किया। यूपीएस और इन्वर्टर की विशेषताओं को मिलाकर भारत को ‘होम यूपीएस’ दिया। दुनिया का पहला ब्लूटूथ-सक्षम टच-स्क्रीन यूपीएस भी उन्हीं की देन है। उनके आकस्मिक आविष्कार से मिले 5 बड़े सबक आज भी उद्यमियों को प्रेरित करते हैं।

पत्नी के साथ से की नई शुरुआत — Su-vastika
Su-Kam के दिवालिया होने के बाद उनकी पत्नी खुशबू सचदेव आगे आईं और उनके मार्गदर्शन में Su-vastika Power System Private Limited की स्थापना की। आजकल कुंवर सचदेव Su-vastika के साथ मिलकर देश में लिथियम बैटरी तकनीक और सोलर एनर्जी के क्षेत्र में नए आयाम स्थापित कर रहे हैं। Su-vastika ने भारत की पहली Solar और Storage R&D प्रयोगशाला भी स्थापित की है।
कुंवर सचदेव का सपना है कि भारत का हर घर सौर ऊर्जा से संचालित हो। उनकी यह यात्रा देश के भावी इंजीनियरों और उद्यमियों के लिए एक प्रेरणा है।
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